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पेपर लीक रोकने को हाईपावर टास्क फोर्स, परीक्षा प्रणाली में होंगे बड़े बदलाव

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नीट पेपर लीक मामले में छात्रों का प्रदर्शन खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधार के लिए हाईपावर टास्क फोर्स गठित करने का ऐलान किया। इसमें छह सदस्य होंगे। इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी अध्यक्ष बनाए गए हैं। यह विशेषज्ञ समूह विशेष रूप से प्रौद्योगिकी आधारित परीक्षा प्रणाली और संरचनात्मक सुधारों पर काम करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि हमारी परीक्षा प्रणाली विश्वस्त हो, इसमें सबसे ज्यादा टेक्नोलॉजी का उपयोग हो। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य के लिए अधिक सुरक्षित व टेक्नोलॉजी आधारित व्यवस्था बनाने पर जोर दे रही है। टास्क फोर्स एनटीए की परीक्षा प्रणाली में सुधार की कार्ययोजना तैयार करेगी।

कड़ा कानून
केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के लिए पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 संसद में पेश किया है। इसमें जेल की अवधि 5 साल से बढ़ाकर 10 साल तक करने का प्रस्ताव है। इसमें जुर्माना बढ़ाकर अधिकतम 50 लाख रुपये तक करने का भी प्रस्ताव है। 2026 बिल में संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों के लिए सजा और जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव है। संगठित क्राइम की स्थिति में कम से कम 10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगेगा। पहले यह एक करोड़ था।

'विश्वसनीय डिजिटल परीक्षा प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम'
फर्स्टपोस्ट डॉट कॉम पर प्रकाशित खबर के मुताबिक साइबर सुरक्षा कंपनी Cyble के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट मंदार पाटिल ने कहा है कि यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून में संशोधन से संगठित परीक्षा धोखाधड़ी करने वालों पर आर्थिक और कानूनी कार्रवाई पहले से कहीं अधिक सख्त होगी। यह कदम टास्क फोर्स द्वारा सुझाए जाने वाले संरचनात्मक सुधारों को भी मजबूती देगा। पाटिल के अनुसार, NTA का काया पलट करने की पहल केवल परीक्षाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक मजबूत और भरोसेमंद डिजिटल परीक्षा वातावरण तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे परीक्षाएं तकनीक आधारित होती जा रही हैं, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा को अतिरिक्त सुविधा नहीं बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली का मूल हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

इसमें शामिल हैं –
प्रश्नपत्र तैयार करना

सुरक्षित तरीके से प्रश्नपत्र का भंडारण

अभ्यर्थियों की पहचान (Authentication)

परीक्षा का संचालन

परिणाम तैयार करना और प्रकाशित करना
उनका कहना है कि यदि शुरुआत से ही सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए तो पेपर लीक और साइबर हमलों की संभावना काफी कम हो सकती है।

AI और नई तकनीक कैसे रोक सकती है पेपर लीक?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक तकनीक परीक्षा सुरक्षा को काफी मजबूत बना सकती है।

मंदार पाटिल ने बताया कि –
– एआई आधारित थ्रेट डिटेक्शन संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान कर सकता है।

– परीक्षा के दौरान असामान्य लॉगिन, एक साथ कई जगह से सिस्टम एक्सेस और उम्मीदवारों के असामान्य व्यवहार का पता लगाया जा सकता है।

– जीरो ट्रस्ट सिक्योरिटी आर्किटेक्चटर अनधिकृत पहुंच को रोक सकती है।

– एंड टू एंड इन्क्रिप्शन से प्रश्नपत्र और डेटा सुरक्षित रहेंगे।

– बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से फर्जी उम्मीदवारों की समस्या कम होगी।

– सिक्योर क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर डेटा सुरक्षा बढ़ाएगा।

– ब्लॉकचेन आधारित रिकॉर्ड प्रबंधन से रिकॉर्ड में छेड़छाड़ लगभग असंभव हो जाएगी।

उनके अनुसार प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परिणाम घोषित होने तक हर चरण में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही नियमित सुरक्षा ऑडिट, AI आधारित निगरानी और मजबूत डेटा गवर्नेंस से परीक्षा प्रणाली पर होने वाले साइबर हमलों का जोखिम काफी कम किया जा सकता है।

केवल तकनीक नहीं, मजबूती के साथ लागू किया जाना भी जरूरी
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल नई तकनीक अपनाना पर्याप्त नहीं होगा। परीक्षा एजेंसियों को इन सुरक्षा उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन, स्पष्ट जवाबदेही और समय-समय पर सुरक्षा परीक्षण भी सुनिश्चित करने होंगे, क्योंकि साइबर खतरे लगातार बदलते रहते हैं।

भारत को एक नई NTA टीम मिली
सरकार ने टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस, साइंस और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के स्पेशलिस्ट को एक साथ लाया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि एग्जाम रिफॉर्म को अब एक मल्टीडिसिप्लिनरी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। नीलेकणी के साथ, पैनल में इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन) के पूर्व चेयरमैन एस सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, IIT मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटी, पूर्व एजुकेशन सेक्रेटरी अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीणा शामिल हैं।

कमेटी को एग्जामिनेशन प्रोसेस में कमज़ोरियों की पहचान करने और ऐसे स्ट्रक्चरल सुधारों की सिफारिश करने का काम सौंपा गया है जो क्वेश्चन पेपर सिक्योरिटी और कैंडिडेट वेरिफिकेशन से लेकर लॉजिस्टिक्स, डिजिटल सिस्टम और गवर्नेंस तक सब कुछ मजबूत करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस टास्क फोर्स की सफलता का असली पैमाना नई तकनीक की जटिलता नहीं, बल्कि यह होगा कि आने वाली परीक्षाएं बिना किसी विवाद के निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से आयोजित हो सकें।

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