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उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह, राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी का दावा; BJP-RSS पर साधा निशाना

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर की पदयात्रा करने का ऐलान किया है। ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ 20 अक्टूबर से शुरू होगी और ओरछा होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का समापन रामलला मंदिर में होगा।

दिग्विजय सिंह ने इसे ‘शिवधाम से रामधाम’ तक की यात्रा बताते हुए कहा कि धर्म का इस्तेमाल न तो धन कमाने के लिए होना चाहिए और न ही राजनीतिक हथियार के तौर पर। उन्होंने दावा किया कि यात्रा में अलग-अलग वर्गों, संप्रदायों और विचारधाराओं के लोग शामिल हो सकते हैं।

राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे को लेकर लगाए आरोप
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और रामलला को मिलने वाले चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यह गड़बड़ी 200 से 300 करोड़ रुपये तक हो सकती है। साथ ही उन्होंने मंदिर निर्माण की लागत, ठेकों और अयोध्या में जमीन खरीद को लेकर भी सवाल उठाए।

हालांकि, ये आरोप दिग्विजय सिंह के दावे हैं। दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जुलाई में मंदिर निर्माण और चढ़ावे से जुड़े वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक किए थे। ट्रस्ट के अनुसार कुल 3264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जिनमें 582 करोड़ रुपये रामलला के चढ़ावे के रूप में मिले।

यात्रा को बताया गैर-राजनीतिक
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी पदयात्रा राजनीतिक नहीं है और इसका उद्देश्य धर्म एवं आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग उठाना है। उन्होंने सनातन धर्म की मूल भावना को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ से जोड़ते हुए धर्म को सामाजिक समरसता और सेवा से जोड़ने की बात कही।

RSS और BJP पर भी निशाना
पदयात्रा के ऐलान के दौरान दिग्विजय सिंह ने RSS और भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म और हिंदुत्व के नाम पर सनातन की मूल भावना को राजनीतिक रूप दिया जा रहा है। वहीं, उन्होंने RSS और VHP से भी यात्रा का समर्थन करने की अपील की है।

राम मंदिर चंदे और चढ़ावे को लेकर पहले से चल रही जांच और विवाद के बीच दिग्विजय सिंह की यह प्रस्तावित पदयात्रा राजनीतिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से चर्चा में है।

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