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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित हो रहे आधुनिक अधोसंरचना नेटवर्क ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, आर्थिक कॉरिडोर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश को नई ऊर्जा मिल रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मध्यप्रदेश में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखने जा रही है। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही 114 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाली यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद जबलपुर शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत
विगत वर्षों में जबलपुर में तेजी से हुए शहरी विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि तथा यात्री एवं मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात दबाव लगातार बढ़ा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जाम, लंबा यात्रा समय और ईंधन की अतिरिक्त खपत आम समस्या बन गई थी।

आउटर रिंग रोड परियोजना इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसके संचालन से लंबी दूरी के वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम होगा और आम नागरिकों को अधिक सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी।

पांच पैकेजों में हो रहा निर्माण
परियोजना को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 5 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर तथा अमझर से बरेला तक के खंड शामिल हैं। सभी पैकेज मिलकर जबलपुर के चारों ओर एक मजबूत बाहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेंगे। इन मार्गों के विकसित होने से जबलपुर हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा। परियोजना के विभिन्न हिस्से इस वर्ष तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से यातायात के लिए खोले जाएंगे।

किसानों की उपज समय पर पहुंचेगी बाजार
परियोजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। वर्तमान में बरेला, शाहपुरा, पाटन, सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

आउटर रिंग रोड बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन तेज होगा, जिससे समय की बचत होगी और किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे। परिवहन लागत कम होने से उनकी आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

स्थानीय किसानों का मानना है कि परियोजना के कुछ प्रारंभिक हिस्सों के संचालन से ही यात्रा में होने वाली देरी में कमी महसूस होने लगी है और पूर्ण परियोजना शुरू होने के बाद यह लाभ और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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