मुख्यमंत्री चौहान ने नीम का पौधा लगाया

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भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मुख्यमंत्री निवास परिसर में नीम का पौधा लगाया। नीम के पौधे के औषधीय गुण हैं। यह संक्रमण दूर करता है। दंत रोगों के उपचार में इसका उपयोग है। नीम की पत्तियों को सुखाकर विभिन्न औषधियाँ तैयार की जाती हैं।

नीम के औषधीय गुण

एंटीबायोटिक तत्वों से भरपूर नीम को सर्वोच्च औषधिके रूप में जाना जाता है। नीम स्वाद में भले ही कड़वा हो, लेकिन इससे होने वाले लाभ अमृत के समान होते हैं।

चिकित्सा शास्त्रियों के अनुसारविषैले कीटों के काट लेने पर नीम के पत्तों को महीन पीस कर काटे गए स्थान पर उसका लेप करने से राहत मिलती है और जहर भी नहीं फैलता। किसी प्रकार का घाव हो जाने पर भी नीम के पत्तों का लेप लगाने से काफी लाभ मिलता है। जैतून के तेल के साथ नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाकर लगाने से नासूर भी ठीक हो जाता है। दाद या खुजली की समस्याएँ होने पर, नीम की पत्तियों को दही के साथ पीस कर लगाने पर काफी जल्दी लाभ होता है। गुर्दे में पथरी होने की स्थिति में नीम के पत्तों की राख को 2 ग्राम लेकर, प्रतिदिन पानी के साथ लेने पर पथरी गलने लगती है और मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है।

मलेरिया बुखार होने की स्थिति में नीम की छाल को पानी में उबालकर, उसका काढ़ा बना लें। अब इस काढ़े को दिन में तीन बार, दो बड़े चम्मच भरकर पीने से बुखार ठीक होता है और कमजोरी भी ठीक होती है।

नीम के तेल का प्रयोग करना त्वचा रोग के लिए लाभकारी होता है। नीम के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर शरीर पर मालिश करने से त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं। नीम के डंठल में, खाँसी, बवासीर, प्रमेह और पेट में होने वाले कीड़ों को खत्म करने के गुण होते हैं। इसे प्रतिदिन चबाने या फिर उबालकर पीने से लाभ होता है। सिरदर्द, दांत दर्द, हाथ-पैर दर्द और सीने में दर्द की समस्या होने पर नीम के तेल की मालिश से काफी लाभ मिलता है। इसके फल निमौरी का उपयोग कफ और कृमिनाशक के रूप में किया जाता है।

नीम के दातुन से दांत मजबूत होते हैं और पायरिया की बीमारी भी समाप्त होती है। नीम की पत्तियों का काढ़ा बनाकर उससे कुल्ला करने पर दाँत व मसूढ़े स्वस्थ रहते हैं। मुँह से दुर्गंध भी नहीं आती। चेहरे पर कील-मुहाँसे होने पर नीम की छाल को पानी में घिसकर लगाने से फायदा होता है।

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